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Corona vaccine: जिन्हें वैक्सीन की ज्यादा जरूरत, 10 में से केवल पांच को ही मिल रही दूसरी खुराक

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कोरोना वैक्सीन की कमी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार अपना-अपना दावा कर रही है लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि जिन्हें वैक्सीन की सबसे ज्यादा जरूरत है उन 10 में से केवल पांच को ही दूसरी खुराक मिल पा रही है। एक मई से टीकाकरण का नया चरण (18-44) शुरू होने के बाद यह स्थिति और भी गंभीर हो चुकी है क्योंकि बीते 29 अप्रैल तक 10 में से दो ही लोग दूसरी खुराक नहीं ले पा रहे थे। अब यह आंकड़ा 50 फीसदी तक कम हुआ है। यह सभी 45 या उससे अधिक आयु वाले हैं। जनवरी 2020 से अब तक की स्थिति देखें तो देश में 82 फीसदी मौतें भी इसी आयुवर्ग में हुई हैं।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि देश में इस समय दूसरी खुराक का आंकड़ा 50 फीसदी तक आ चुका है जो काफी चिंता की बात है। ऐसा होने से टीकाकरण अधूरा रहने की आशंका बढ़ जाती है। हमारी राज्यों से अपील है कि दूसरी खुराक वालों को प्राथमिकता दी जाए। हर दिन कम से कम 70 फीसदी टीकाकरण इन्हीं लोगों का होना चाहिए। हालांकि उन्होंने बताया कि सात राज्यों में इससे ठीक विपरीत्त स्थिति है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, त्रिपुरा, केरल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नए लोग (18 से 44 वर्ष आयु) की अपेक्षा दूसरी खुराक लेने वालों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अप्रैल तक 82.5 फीसदी को मिल रही थी दूसरी खुराक


आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च तक भारत में 71 फीसदी लोगों को दूसरी खुराक मिल पा रही थी। अप्रैल में वैक्सीन की आपूर्ति को बढ़ाने पर यह आंकड़ा 82.5 फीसदी तक पहुंच गया था लेकिन 12 मई को यह राष्ट्रीय स्तर पर 50 फीसदी दर्ज किया है। वैक्सीन की कमी को लेकर कुछ और आंकड़े भी इशारा कर रहे हैं। एक से 15 अप्रैल के बीच देश में 4.65 करोड़ लोगों को पहली खुराक दी गई। जबकि बीते तीन सप्ताह की स्थिति देखें तो हर दिन 20 लाख लोगों को ही खुराक दी जा रही है। यानि 15 दिन में तीन करोड़ जोकि एक से 15 अप्रैल की तुलना में कम है।

वैक्सीन देने से यहां मौतें हुईं कम


45 या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक देने के बाद कुछ जगहों पर मौत के मामले कम हुए हैं। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महामारी विशेषज्ञ डॉ. गिरधर बाबू का कहना है कि दोनों टीके संक्रमण के विकास की संभावना को कम करने के साथ-साथ गंभीर बीमारी और मृत्यु की संभावना को कम करने के लिए सिद्ध हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि मुंबई और पुणे में 45 वर्ष से अधिक आयु वालों को वैक्सीन देने के बाद मौत में कमी आई है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। हालांकि केरल ने 60 वर्ष से अधिक आयु के 54 फीसदी से अधिक लोगों को कम से कम एक खुराक दी है। कर्नाटक ने 48 और महाराष्ट्र ने 40 फीसदी टीकाकरण किया है। जबकि तमिलनाडु में सबसे कम केवल 17 फीसदी लोगों को ही टीकाकरण किया है।

दिल्ली में 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी छूटे


16 जनवरी से टीकाकरण कार्यक्रम संचालित होने और वैक्सीन की कमी को लेकर सबसे ज्यादा आरोप लगाने वाली दिल्ली सरकार ने टीकाकरण पर अधिक ध्यान नहीं दिया है। इसका खामियाजा यह रहा कि दिल्ली में 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी अभी भी वैक्सीन लेने से दूर हैं। जबकि इन लोगों में दूसरी खुराक की स्थिति 70 फीसदी से भी कम है। इतना ही नहीं देश की राजधानी में 10 में से सात लोगों को दूसरी खुराक लेने का अभी इंतजार है।

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