नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति कानून पर अपने फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका और कानून में संशोधन के खिलाफ दायर नई याचिकाओं पर एक साथ नये सिरे से सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि पुरानी पीठ के बदल जाने से ऐसा किया जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने 26 मार्च से लगातार तीन दिनों तक सुनवाई की तारीख तय की है।

पिछले साल 20 मार्च को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों के खिलाफ एससी एसटी कानून के दुरुपयोग को देखते हुए उसमें गिरफ्तारी के प्रावधानों को हल्का कर दिया था। अदालत ने प्राथमिक जांच के बाद ही आपराधिक केस दर्ज करने और सरकारी कर्मचारियों के मामले में गिरफ्तारी से पहले संबंधित अधिकारी से पूर्व अनुमति लेने को भी आवश्यक बना दिया था।

जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदू मलहोत्रा की पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई कर रही पुरानी पीठ जस्टिस आदर्श गोयल के रिटायर होने से बदल गई है, इसलिए सभी मामलों पर नये सिरे से सुनवाई होगी। पीठ ने कहा कि मामले पर लगातार तीन दिनों तक सुनवाई होगी और जरूरत पड़ी तो एक या दो दिनों तक सुनवाई बढ़ाई भी जा सकती है।

सर्वोच्च अदालत ने 30 जनवरी को मामले पर सुनवाई करते हुए एससी एसटी कानून में संशोधनों पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देश में बवाल के बाद केंद्र सरकार ने संसद में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 2018 पारित कर सर्वोच्च अदालत के फैसले को बदल दिया था। संशोधित कानून के मुताबिक आपराधिक केस दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच और गिरफ्तारी से पूर्व अनुमति के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया था।

Posted By: Arun Kumar Singh