जेएनएन, संबलपुर। धरती पर पहले अंडा आया या मुर्गी? सवाल सदियों से बहस का विषय रहा है। अगर कहेंगे कि मुर्गी पहले आई तो पूछा जाएगा कि बगैर अंडे के मुर्गी कहां से आई? वह अंडे से ही निकली होगी। अब दोबारा यह सवाल उठेगा कि अंडा कहां से आया? ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में एक मुर्गी ने अंडे की जगह चूजे को जन्म देकर इस बहस को प्रासंगिक कर दिया है। गत रविवार की बात है। कोमना प्रखंड की साराबोंग पंचायत के इच्छापुर गांव निवासी अंबिका माझी की मुर्गी ने अंडे की जगह एक चूजे को जन्म दिया।

दस मिनट तक जिंदा रहा चूजा

मुर्गी अपने नौ अंडों को से रही थी कि अचानक वह कुछ दूर जाकर बैठ गई। वहां मौजूद ग्रामीणों ने देखा कि मुर्गी बहुत देर से एक ही स्थान पर बैठी हुई है। उनको लगा कि मुर्गी ने अंडा दिया होगा। जब ग्रामीणों ने मुर्गी को उठाकर देखा तो आश्चर्यचकित रह गए। मुर्गी ने अंडा की जगह एक चूजे को जन्म दिया था। उन्होंने आसपास देखा कि कहीं कोई फूटा हुआ अंडा तो नहीं है। आसपास ऐसा कुछ नहीं दिखा। इस विचित्र घटना को देखकर ग्रामीण हैरत में पड़ गए। ग्रामीणों का कहना है कि चूजा दस मिनट तक जिंदा रहा, फिर मर गया।

क्‍या कहते है विशेषज्ञ

नुआपाड़ा जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. त्रिलोचन ढल कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी घटना न देखी है न ही सुनी है। कहा, संभवत: मुर्गी के प्रजनन तंत्र में एक अंडा विकसित हो गया होगा। यह अंडा शरीर से बाहर आने की जगह 21 दिनों तक अंदर ही रहा गया हो और वहीं चूजा विकसित हो गया हो। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सूचना मिलती तो इस मामले की जांच की जाती।

पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं

वर्ष 2012 में श्रीलंका के एक पहाड़ी क्षेत्र में एक मुर्गी ने बिना अंडा दिए पूर्ण रूप से विकसित एक चूजे को जन्म दिया था, पर अंदरूनी जख्म की वजह से मुर्गी की मौत हो गई थी। इसी तरह वर्ष 2018 में केरल के वायनाड जिले के कमबालक्काड गांव में भी एक मुर्गी ने बिना अंडा दिए चूजे को जन्म दिया था। चूजे का गर्भनाल भी पाया गया था, लेकिन वह मृत था। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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