नई दिल्ली, आइएएनएस। एयर इंडिया की अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद टाटा संस अपनी सभी विमानन कंपनियों में सामंजस्य लाने की योजना बना रही है। इसका मकसद विमानन बाजार के अलग-अलग सेग्मेंट में स्पर्धा में आगे रहना है। एयर इंडिया के लिए सरकार के साथ खरीद-बिक्री करार (एसपीए) हो जाने के बाद टाटा ग्रुप के पास चार विमानन कंपनियां होंगी। इनमें दो फुल सर्विस एयरलाइंस विस्तारा व एयर इंडिया तथा दो बजट एयरलाइंस एयरएशिया इंडिया व एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं। इनके अलावा टाटा ग्रुप के पास ग्राउंड व कार्गो हैंडलिंग कंपनी एआइएसएटीएस भी आ जाएगी।

ग्रुप की योजना के अनुसार एसपीए के बाद कुछ समय के लिए उसकी सभी विमानन कंपनियां अपनी अलग-अलग पहचान के साथ एक विमानन इकाई के तहत काम करेंगी। इसके साथ ही टाटा ग्रुप फ्लीट मैनेजमेंट यानी सभी कंपनियों के विमान बेड़े के प्रबंधन, रूट पर विमानों की तैनाती व टाइमिंग तथा एयरपोर्ट पर टाइम स्लाट के मामले में आपसी सामंजस्य की योजना पर काम कर रहा है। जहां तक विशेषता की बात है तो विस्तारा का प्रीमियम सर्विस का रुतबा बरकरार रहेगा। वहीं, एयर इंडिया मुख्य रूप से विदेशी व घरेलू मेट्रो गंतव्यों पर परिचालन में रहेगी। अन्य घरेलू मार्गो पर एयरएशिया इंडिया को प्रमुखता दी जाएगी। इस कंपनी के बेड़े में एयर इंडिया के बेड़े से कुछ विमान शामिल किए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि टाटा संस ने एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी समेत एयर इंडिया एक्सप्रेस व एआइएसएटीएस के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 12,906 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस रखी थी।

सौदा पूरा होने तक खर्च नियंत्रण में रखें कर्मचारी

एयर इंडिया के कार्यवाहक चेयरमैन व एमडी ने कर्मचारियों से कहा है कि जब तक टाटा ग्रुप द्वारा कंपनी के अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक के लिए वे खर्च को नियंत्रण में रखें। इस भूमिका का निर्वहन कर रहे विमानन सचिव राजीव बंसल ने अपने आदेश में कर्मचारियों से कहा है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक वे सिर्फ उन खर्चो से काम चलाएं, जो कंपनी को परिचालन में रखने के लिए अत्यधिक जरूरी हैं। आदेश में कहा गया है कि अधिग्रहण प्रक्रिया अगले करीब 10 हफ्तों में पूरी हो जाने की उम्मीद है।